शुक्रवार, 3 मई 2013

दिल

मेडिकल साइन्स बताता है मानव दिल मे चार खाने होते हैं,पर क्या एक औरत के दिल मे बस चार ही कमरे होते हैं?बड़ा ही पेचीदा बनावट होता एक औरत का दिल.इसमे अनगिनत तो छुपे तहखाने होते  है,खानो के अंदर कई खाने और उनपर कई कई मोटे पर्दे पड़े होते हैं.जाने कितने सारे राज इन कमरो  के दीवारों के पीछे कैद होंगे,जाने कितनी जीवंत इक्षाएं,सपने और कल्पना मोटे-मोटे पर्दो के पीछे बैठी आज भी आहें भर रहीं होंगी.औरत के दिल मे इतने सारे परत दर परत तले एक ऐसा अंग सुरक्षित पलता रहता है जिस का चित्र आज तक मेडिकल साइन्स नहीं जारी कर पाया है,वो है "मन".हृदय के किस कोने यह अंग पलता रहता है,किसी को नहीं मालूम.मन जिस का आकार-प्रकार तो पता नहीं पर नाजुक जरूर होता है.औरत हज़ार परतो के भीतर इसे छुपा कर,ज़िंदगी के  हर उतार-चड़ाव मे इसे दबाए  जीती रहती है.कभी रात के सन्नाटे मे,अकेले भोर मे दिल की  कहीं कोई तुरपन खुल जाती है और फिर मन उसी रास्ते रिसने लगता है...... कोई कांटा कभी दिल मे चुभा था....सारी रात मन को चुभती रहती है.रिसती जाती है.....चेहरा भिगोती जाती है....

9 टिप्‍पणियां:

  1. मेडिकल साइंस दिल के आकार का वर्णन कर सकती है दिल की भावनाओं से क्या वास्ता उसका ........आपने बहुत अच्छा लिखा

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    1. धन्यवाद अरुणा जी,आपने मेरे दिल की बात समझी .

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  2. जटिल प्रश्न जिसका उत्तर शायद ही किसी के पास हो - अनूठी सोच

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    1. धन्यवाद राकेश कौशिक जी......मेरे ब्लॉग तक आने और अपनी राय जाहिर करने के लिए.

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    2. जगत भामिनी के ह्रदय, भए खंड कुल चार ।
      एक प्रियतम एक संततिहि, शेष पिहर ससुरार ॥

      भावार्थ : -- संसार में नारी के ह्रदय में चार खंड होते हैं,
      एक प्रियतम का एक सन्तति का शेष दो पीहर और
      ससुराल का ॥

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    3. नीतू जी,बहुत खूब.आपने बहुत ही अच्छा बताया.

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  3. Hazar parton ke bhitar chupaye lakhon baten....anginat bhed,,sine me dabaye kya kushalta se puri jindgi muskan wodhe ji jati hai.....yahi jijivisha to use aadikal se purushon ki mansikta ka shikar banai hai.......bahut achhe jajwat....umda shabd

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  4. Hazar parton ke bhitar chupaye lakhon baten....anginat bhed,,sine me dabaye kya kushalta se puri jindgi muskan wodhe ji jati hai.....yahi jijivisha to use aadikal se purushon ki mansikta ka shikar banai hai.......bahut achhe jajwat....umda shabd

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